विजन 2030

वृद्धि के लिए क्षमता विस्तार

राज्य के जिन जनपदों का मानव विकास सूचकांक (Human Development Index)  कम है उनमें प्राविधिक शिक्षा के समरस विकास  (Homogeneous Development)  हेतु डिप्लोमा स्तरीय तकनीकी शिक्षण संस्थान स्थापित किये जायेंगे । मानव विकास सूचकांक कुछ प्रमुख संकेतांकों (Indicators)  जैसे-साक्ष्ज्ञरता दर, शिशु मृत्यु दर, प्रति व्यक्ति आय एवं प्रति लाख जनसंख्या पर तकनीकि संस्थाओं की स्थापना पर आधारित होता है। वर्तमान में राष्ट्रीय मानव विकास सूचकांक 0.632 है,  जबकि राज्य विकास सूचकांक 0.397 हैं। अतः दृष्टि पत्र 2030 में औसत राष्ट्रीय विकास सूचकांक के स्तर को प्राप्त किये जाने का ध्येय होगा। राज्य के प्रत्येक मण्डल में कम से कम एक इंजीनियरिंग कॉलेज स्थापित किये जाने का लक्ष्य है। राज्य के सभी डिग्री एवं डिप्लोमा स्तरीय संस्थानों में कुल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio) में अभिवृद्धि किये जाने हेतु विशेष प्रयास किये जायेंगे। राज्य में नवीन इंजीनियरिंग कॉलेज तथा तकनीकी विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान  (RUSA)   के अन्तर्गत स्थापित किया जाएगा।

कौशल विकास तथा रोजगार सृजन में अभिवृद्धि

ऐसी मान्यता है कि भारत की शिक्षा नीति जीविका के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं करा पा रही है। साथ ही बहुत से सेक्टरों में जनशक्ति की कमी भी महसूस की जा रही है। विजन -2030 इस तथ्य पर केंद्रित होगा कि शिक्षण-प्रशिक्षण में गुणवत्ता आये ताकि औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित जनशक्ति तैयार की जा सके। प्रधानमंत्री भारत सरकार द्वारा निर्धारित कौशल विकास के लक्ष्य  Start-up India को मूर्त रूप देने के लिए जनपद उन्नाव में एक स्किल एवं डिजाईन इन्सटीट्यूट की स्थापना की जायेगी।

पर्यावरणीय प्रबन्धन

पर्यावरणीय एवं पारिस्थिकीय असंतुलन एवं स्थानिक सार्वभौमिक समस्या है। पर्यावरणीय तथा पारिस्थिकीय असंतुलन को कम करने के उद्देश्य से तकनीकी शिक्षण संस्थानों के भवन, वर्कशाप, लैब आदि का निर्माण इस ढंग से किया जायेगा कि पारिस्थिकीय तंत्र  (Ecosystem)  को कोई क्षति न हो तथा संस्थाओं में इको-फ्रेंडली वातावरण तैयार किया जा सके।

उद्योग / बाजार उन्मुख प्रशिक्षित जनशक्ति तैयार किया जाना

औद्योगिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु प्रशिक्षित जनशक्ति की मांग और आपूर्ति में साम्यावस्था स्थापित करने के उद्देश्य से प्रशिक्षित जनशक्ति तैयार की जायेगी। टेडीशनल पाठ्यक्रम जिनमें रोजगार विभव (Employment Potential)  अधिक हैं, तकनीकि संस्थाओं में प्रारम्भ किये जायेंगे। रोजगार विभव का आकलन राष्ट्रीय तकनीकी जनशक्ति सूचना तंत्र(National Technical Manpower Information System)  से प्राप्त किया जायेगी।

विकेन्द्रीकरण तथा अधिकारों का प्रतिनिधायन

मानव संसाधनों के अधिकतम एवं उपयुक्तम उपयोग के लिए विकेन्द्रीकरण तथा अधिकारों के प्रतिनिधायन की नितान्त आवश्यकता है। प्राविधिक शिक्षण संस्थानों में सर्वोत्तम अनुश्रवण तथा प्रशासनिक नियंत्रण हेतु क्षेत्रीय संयुक्त निदेशकों को वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार प्रतिनिधानित किये जायेंगे। क्षेत्रीय संयुक्त निदेशकों के पदों को अपर निदेशक के पदों पर उच्चीकृत किया जाना चाहिये। विकेन्द्रीकरण के दृष्टिगत प्राविधिक शिक्षा परिषद को विक्रेन्द्रित किया जाना होगा ताकि समय पर परीक्षाएं एवं परीक्षा परिणाम प्राप्त हो सकें। प्रदेश में दिन-प्रतिदिन नवीन पालीटेक्निक स्थापित किये जा रहे हैं अतः उनके प्रभावी अनुश्रवण हेतु नये क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित किये जाने का भी विजन है।

भविष्य में ऊर्जा की आवश्यकताओं की पूर्ति

भविष्य में तीव्रगामी वृद्धि के दृष्टिगत अत्यधिक ऊर्जा के उपयोग की आवश्यकता रेखांकित होगी। इस ऊर्जा की आवश्यकता की पूर्ति पर्यावरणीय स्थितियों को बिना क्षति पहुंचाए किस प्रकार पूर्ण की जाये, यह एक उज्वलंत प्रश्न हैं। इस प्रश्न को हल करने हेतु पालिटेक्निकों तथा इंजीनियरिंग कॉलेजों के भवनों में सौर ऊर्जा पावर प्लान्ट नीति के क्रियान्वयन पर विजन 2030 क्रेन्द्रित होगा।

ई- लर्निंग के द्वारा त्वरित विकास

वर्तमान में विकास के क्रांतिक परिदृष्य में  शिक्षण-प्रशिक्षण की आधुनिकतम प्राविधियां विकसित हो रही हैं। यथा वेब- पोर्टल के माध्यम से वर्चुअल क्लासरूम की स्थापना भी आधुनिक प्राविधियों में से ही एक है, अतः राज्य के समस्य पालीटेक्निकों में वर्चुअल क्लासरूम की स्थापना किये जाने का लक्ष्य है।

ग्रामोत्थान के लिए प्रौद्योगिकी स्थानान्तरण

ग्रामीण विकास भी विजन 2030 का एक प्रमुख अंग है, जिसके लिए विभिन्न पालीटेक्निकों में संचालित सी0डी0टी0पी0 योजना (Community Development Through Polytechnic)  के अन्तर्गत ग्रामीण युवक एवं युवतियों को अल्पकालीन प्रशिक्षण प्रदान किये जायेंगे ताकि वे न केवल स्वरोजगार के लिए सक्षम हो सकें बल्कि उन्हें मुख्य विकासधारा में भी जोड़ा जा सके। वर्तमान में प्रदेश की 59 पालीटेक्निक में सी0डी0टी0पी0 योजना संचालित की जा रही हैं तथा प्रदेश की समस्त पालीटेक्निक में यह योजना संचालित किये जाने का लक्ष्य है।

वित्तीय प्रबन्धन एवं उनके स्त्रोत

वित्तीय प्रबन्धन हेतु प्रमुखत: 3 स्त्रोत ही हैं यथा-केन्द्र सरकार, राज्य सरकार तथा प्राइवेट तथा प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (PPP)  के माध्यम से एन0जी0ओ0। केन्द्रीय आर्थिक सहायता ऐसे अभियंत्रण पाठ्यक्रमों के लिए आवश्यक होगी जिनकी ग्लोबल मार्केट में अत्यधिक महत्ता हैं ताकि देश एवं प्रदेश के पालिटेक्निकों एवं इंजीनियरिंग कॉलेजों से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवा ग्लोबल मार्केट में अपनी ग्लोबल प्रजेन्स स्थापित कर सकें ।