विशेष प्रावधान

डा0 अम्बेडकर इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी फार हैण्डीकैप्ड, कानपुर

राष्ट्रीय नवीन शिक्षा नीति-1986 तथा विकलांगजन (अवसरों की समानता, अधिकार, संरक्षण एवं पूर्ण सहभागिता) अधिनियम-1995 के अनुपालन स्वरूप राज्य के शारीरिक विकलांगता से ग्रसित नवयुवकों को तकनीकी शिक्षा से जोड़ कर उनकी समाज के लिये उपादेयता में वृद्धि करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने वर्ष 1997 में तत्कालीन विश्वबैंक सहायतित परियोजना के अंतर्गत कानपुर में डॉ0 अम्बेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी फार हैण्डीकैप्ड (ए0आई0टी0एच0) की स्थापना की गई है। प्रथम चरण में तीन डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के साथ इस संस्थान का शुभारम्भ सत्र 1998-99 से किया गया। एच0बी0टी0आई0 के पश्चिमी परिसर में से उपलब्ध कराई गई 15 एकड़ भूमि पर स्थापित इस संस्थान में निम्न डिप्लोमा पाठ्यक्रम मल्टी प्वाइंट एण्ट्री एण्ड क्रेडिट के अंतर्गत ही संचालित हो रहे हैं। क्रमांक-4 पर उल्लिखित इलेक्ट्रानिक्स इंजी0 का पाठ्यक्रम स्ववित्त पोषित आधार पर शिक्षण सत्र 2009-10 से प्रारम्भ किया गया है:-

क्र0सं0 पाठयक्रम का नाम अवधि वार्षिक प्रवेश क्षमता
  आर्कीटेक्चरल असिस्टेण्टशिप 3 वर्ष 40
  कम्प्यूटर साइंस एण्ड इंजीनियरिंग 3 वर्ष 40
  मॉडर्न ऑफिस मैनेजमेण्ट एण्ड सेक्रेटेरियल प्रैक्टिस 2 वर्ष 40
  इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग 3 वर्ष 40

विकलांगजन हेतु अन्य पालीटेक्निक संस्थाओं में व्यवस्था

उक्त विशिष्ट संस्था- ए0आई0टी0एच0 के अतिरिक्त भारत सरकार मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा स्वीकृत "स्कीम फार इन्टीग्रेटिंग परसन्स विद डिसएबिलिटीज इन दि मेन स्ट्रीम ऑफ टेक्नीकल एण्ड वोकेशनल एजूकेशन" के अन्तर्गत राजकीय पालीटेक्निक झॉसी एवं राजकीय महिला पालीटेक्निक मुरादाबाद में भी विकलांग छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, इसके अतिरिक्त अन्य सभी संस्थाओं में भी प्रवेश हेतु 03 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की सुविधा अनुमन्य है।

 

महिला पालीटेक्निको की स्थापना

विभाग तकनीकी शिक्षा में महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने व नवीनतम तकनीकी प्रशिक्षण की सुविधायें प्रदेश की महिलाओं तक पहॅुचाने की दिशा में प्रयासरत है।
   महिला संस्थाओं की संख्या में वृद्धि का क्रम निम्नांकित तालिका से स्पष्ट होता है:-

क्र0सं0 अवधि महिला पालीटेक्निकों की संख्या
राजकीय अनुदानित
  2 3 4
  प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-56) - -
  द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956-61) - -
  तृतीय पंचवर्षीय योजना (1961-66) 1 -
  चतुर्थ पंचवर्षीय योजना (1969-74) 1 -
  पंचम् पंचवर्षीय योजना (1975-80) 1 -
  षष्टम् पंचवर्षीय योजना (1980-85) 3 2
  सप्तम् पंचवर्षीय योजना (1985-90) 8 2
  वर्ष 1990-91 11 2
  वर्ष 1991-92 11 2
  अष्टम् पंचवर्षीय योजना (1992-97) 11 2
  नवम् पंचवर्षीय योजना (2001-2002) 15 2
  दशम् पंचवर्षीय योजना (2002-2007) 15 2
  ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना (2007-2012) 16 2
  बारहवीं पंचवर्षीय योजना (2012-17) 16 2
  तेरहवीं पंचवर्षीय योजना (2017-22) 16 2

    तकनीकी शिक्षा में महिलाओं की भीगीदारी बढ़ाने एवं तकनीकी शिक्षा के आधुनिक विषयों में महिलाओं को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से प्रदेश में महिलाओं के प्रशिक्षण, विकास एवं नई संस्थाओं की स्थापना पर बल दिया गया है। वर्ष 1982-83 तक प्रदेश में महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करने की एक मात्र संस्था लखनऊ में थी, जिनकी संख्या वर्ष 1996-97 तक बढ़कर 13 हो गई। वर्ष 1997-98 तक बढ़कर 13 हो गई। वर्ष 1997-98 में महिलाओं के लिए 04 नई संस्थायें कुम्हारहेड़ा (सहारनपुर), बादलपुर (गौतमबुद्ध नगर), मेजा (प्रयागराज) तथा अयोध्या में स्वीकृत की गई। वर्ष 1999-2000 में महिलाओं हेतु राजकीय महिला पालीटेक्निक, बलिया में स्वीकृत की गई। नवम्बर, 2000 में उत्तरांचल राज्य गठन के फलस्वरूप 02 संस्थाएं उत्तरांचल राज्य में स्थानान्तरित हो गई। वर्ष 2001-2002 में शासन द्वारा दौराला (मेरठ) में एक राजकीय महिला पालीटेक्निक स्वीकृत की गई। वर्ष 2007-2008 में शासन द्वारा चरखारी (महोबा) में एक राजकीय महिला पालीटेक्निक खोले जाने की स्वीकृति प्रदान किए जाने के फलस्वरूप प्रदेश में महिला संस्थाओं की संख्या 18 हो गई है, उन सभी में प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। वर्ष 2015-16 में इन महिला संस्थाओं की प्रवेश क्षमता 5005 थी परन्तु 05 राजकीय महिला पालीटेक्निकों यथा-अमेठी, बादलपुर, दौराला मेरठ, बरेली एवं सहारनपुर में जहॉ द्वितीय पाली संचालित की जानी थी, में ए0आई0सी0टी0ई0 से अनुमोदन प्राप्त न होने के कारण शैक्षिक सत्र 2016-17 में इन संस्थाओं में द्वितीय पाली में छात्राओं को प्रवेश देना सम्भव न हो सका। उपरोक्त तारतम्य में अंतत: द्वितीय पाली की प्रवेश क्षमता हटाते हुये शैक्षिक सत्र 2016-17 में महिला संस्थाओं की प्रवेश क्षमता 4345 रह गई है।
     डिप्लोमा स्तरीय तकनीकी शिक्षा में महिलाओं की सहभागिता और अधिक बढ़ाने के उद्देश्य से सह-शिक्षा पालीटेक्निक संस्थाअें में महिलाओं को प्रवेश में 20 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की सुविधा शैक्षिक सत्र 2002-2003 से प्रदान की गई है। छात्राओं को तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में सहभागी बनाने हेतु प्रवेश की पालीटेक्निक संस्थाओं में चल रहे उपयोगी डिप्लोमा पाठ्यक्रमों एवं रोजगार के अवसरों की जानकारी देने हेतु राजकीय महिला पालीटेक्निक मुरादाबाद, प्रयागराज, लखनऊ तथा राजकीय पालीटेक्निक कानपुर में कैरियर काउन्सिलिंग सेन्टर्स स्थापित किये गये हैं, जिन्हें और अधिक सुद्ढ़ एवं कार्यशील बनाने हेतु विभाग प्रयासरत है।
    उपरोक्त के अतिरिक्त सत्र 2007-08 से स्ववित्त पोषित आधार पर राजकीय पालीटेक्निक, कानपुर में इलेक्ट्रानिक्स इंजीनियरिंग व पोस्ट ग्रेज्युएट डिप्लोमा इन कम्प्यूटर एप्लीकेशन पाठ्यक्रमों में तथा राजकीय पालीटेक्निक, गाजियाबाद में इलेक्ट्रानिक्स इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में छात्राओं के लिये प्रात: कालीन कक्षाओं में प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग एवं आर्थिक दृष्टि से कमजोर सामान्य वर्ग के छात्रों के लिये सुविधायें

प्राविधिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत डिप्लोमा स्तरीय संस्थानों में प्रवेश हेतु अनुसूचित जाती, जनजाती, अन्य पिछड़ा वर्ग व अन्य श्रेणियों के लिए भारत सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के आधार पर आरक्षण के प्रावधान भी किए गए हैं।
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं आर्थिक दृष्टि से कमजोर सामान्य वर्ग के पात्र छात्रों को समाज कल्याण विभाग, अन्य पिछड़े वर्ग के छात्रों को पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग एवं अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों को अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की सुविधा प्रदान की जाती है।

 

पाठ्यचर्या विकास

वर्ष 1989-90 में पाठ्यचर्या विकास कार्यो को सुचारू रूप से सम्पादित करने के उद्देश्य से इस संस्थान में एक पाठ्यचर्या विकास प्रकोष्ठ की स्थापना की गई। आधुनिक उद्योगों/संगठनों की आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्क्रमों के स्तर में गुणात्मक सुधार लाने की दृष्टि से संस्थान में स्थापित पाठ्यचर्या विकास केन्द्र द्वारा तकनीकी शिक्षा क्षेत्र के अनुभवी विद्वानों, उद्योगों में कार्यरत विशेषज्ञों, सेवायोजकों तथा विषय अध्यापकों की सहायता से कार्यशालाएं आयोजित कर पाठ्यचर्या विकसित की जाती है। साथ ही प्रत्येक तीन वर्ष के अन्तराल पर सम्बन्धित सेवायोजकों से छात्रों में अपेक्षित ज्ञान एवं कौशल के बारे में सर्वेक्षण कराकर उनके द्वारा प्राप्त पश्चनिवेश (फीडबैक) के आधार पर पाठ्यचर्याओं को संशोधित / पुनरीक्षित भी किये जाने का प्राविधान रखा गया है। समस्त पाठ्यचर्याओं में कम्प्यूटर एप्लीकेशन, इण्टरप्रिन्योरिशिप डेवलपमेन्ट, सोर्सेज ऑफ नान कन्वेशनल एनर्जी तथा इनवायरमेन्ट एण्ड पाल्यूशन कन्ट्रोल आदि विषयों का समावेश किया गया है।
    सत्र 2012-13 में 27 पाठ्यक्रम की पाठ्यचर्या मे पुनरीक्षण के साथ ही 20 पाठ्यक्रमों का पुनरावलोकन किया गया। सत्र 2013-14 में 20 पाठ्यक्रम की पाठ्यचर्याओं का पुनरीक्षण तथा 06 नवीन पाठ्यक्रम की पाठ्यचर्याओं का निर्माण कार्य एवं 10 पाठ्यचर्याओं का पुनरावलोकन किया जा चुका है। सत्र 2014-15 में 07 पाठ्यक्रम की पाठ्यचर्याओं का पुनरीक्षण, 05 नवीन पाठ्यक्रमों की पाठ्यचर्याओं का निर्माण तथा 09 पाठ्यक्रम की पाठ्यचर्याओं को सेमेस्टर प्रणाली में परिवर्तित किया गया है।

  • सत्र 2015-16 में 33 पाठ्यक्रमों की पाठ्यचर्याओं का पुनरीक्षण का कार्य किया गया।
  • सत्र 2016-17 में 58 पाठ्यक्रम की पाठ्यचर्याओं का पुनरीक्षण का कार्य किया गया।
  • सत्र 2017-18 में 62 पाठ्यक्रम की पाठ्यचर्याओं का एन एस क्यू एफ के अनुसार पुनरीक्षण / निर्माण कार्य किया जाना प्रस्तावित है।

 

पाठ्य संसाधन विकास

संस्थान द्वारा वर्ष 2012-13 में 03 लैब मैनुअल, 14 सी0डी0, 07 हैण्ड आउट्स, 03 प्रश्न बैंक तथा 07 प्रशिक्षण लर्निंग पैकेज तैयार कर प्रशिक्षार्थियों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों के दौरान वितरित किये गये।

  • सत्र 2013-14 में विभिन्न टापिकों की सी0डी0 एवं हैण्डआउट्स प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों के दौरान उनकी सी0डी0 एवं हैण्डआउट्स तैयार करवाकर वितरित किये गये।
  • सत्र 2014-15 में प्रशिक्षण कार्यक्रमों के दौरान उनकी सी0डी0 एवं हैण्डआउट्स तैयार करवाकर प्रशिक्षणार्थियों का वितरित किये गये।
  • सत्र 2015-16 में प्रशिक्षण कार्यक्रमों के दौरान उनकी सी0डी0 एवं हैण्डआउट्स तैयार करवाकर प्रशिक्षणार्थियों का वितरित किये गये।
  • सत्र 2016-17 में प्रशिक्षण कार्यक्रमों के दौरान उनकी सी0डी0 एवं हैण्डआउट्स तैयार करवाकर प्रशिक्षणार्थियों का वितरित किये गये।
  • सत्र 2017-18 में प्रशिक्षण कार्यक्रमों के दौरान विषय-विशेषज्ञों से प्राप्त सी0डी0 एवं हैण्डआउट्स इत्यादि प्रशिक्षणार्थियों को वितरित किया जाना प्रस्तावित है।

 

ई-लेक्चर्स तैयार किया जाना

प्रदेश के पॉलीटेक्निक संस्थाओं में प्रवेश पाने वाले छात्रों में शिक्षण-प्रशिक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने के दृष्टिगत प्रवेशित छात्रों की अर्हता के अनुसार हिन्दी-अंग्रेजी मिश्रित भाषा में ई-कन्टेन्ट / ई-लेक्चर तैयार कर वेब साइट पर उपलबध कराया जाना आवश्यक था ताकि प्रदेश के छात्र प्रदेश के पॉलीटेक्निकों में कार्यरत शिक्षकों द्वारा सरल हिन्दी-अंग्रेजी भाषा में प्राविधिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश द्वारा अनुमोदित पाठ्चर्या के तैयार ई-लेक्चर को अपनी सुविधानुसार उपयोग कर लाभान्वित हो सकें।
    एन0आई0टी0टी0टी0आर0, चण्डीगढ़ से प्राप्त इलेक्ट्रनिक्स इंजीनियरिंग के 04 विषयों की 100 से अधिक ई-लेक्चर को संस्थान की वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर अपलोड किया जा चुका है जिसके द्वारा छात्र-छात्रायें अपनी सुविधानुसार उपरोक्त वेबलिंग के माध्यम से ई-लेक्चर का सदुपयोग कर सकते है। इसी प्रकार संस्थान तथा राजकीय पॉलीटेक्निक, गाजियाबाद में स्थापित ई0एम0आर0सी0 / स्टूडियों से प्रसारित होने वाले ई-लेक्चर संस्थान की वेबसाईट के माध्यम से छात्र - छात्राओं हेतु उपलब्ध है।

 

वर्चुअल क्लासरूम/इलेक्ट्रानिक्स मीडिया रिसोर्स सेंटर

वर्चुअल क्लासरूम प्रतिभागियों को संसाधनों से सुसज्जित ऑनलाइन क्लासरूम के माध्यम से सम्वाद सीखने एवं समूहों में काम करने की अनुमति देता है। इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य कम से कम समय में प्रभावपूर्ण ढंग से तकनीकी ज्ञान वेबपोर्टल के माध्यम से अधिक से अधिक छात्रों को दिया जाना एवं विभिन्न संस्थाओं में फैकल्टी की कमी को पूर्ण करते हुए गुणवत्तापरक शिक्षण-प्रशिक्षण दूरस्थ संस्थाओं के छात्रों को उपलब्ध कराये जाने का महत्वपूर्ण विकल्प है।
     इस योजना के अन्तर्गत दो इलेक्ट्रानिक्स मीडिया रिसोर्स सेंटर / स्टूडियों की स्थापना शोध विकास एवं प्रशिक्षण संस्थान उ0प्र0 कानपुर एवं राजकीय पॉलीटेक्निक गाजियाबाद में की गयी है जिन्हें वर्तमान में प्रदेश के 13 पॉलीटेक्निकों में स्थापित वर्चुअल क्लासरूम से जोड़ा गया है। इलेक्ट्रनिक मीडिया रिर्सोस सेंटर द्वारा तैयार ऑपरेशनल प्लान / कार्यक्रम के अनुसार सजीव ई-लेक्चर का प्रसारण विभागीय विषय-विशेषज्ञों द्वारा दिनांक 22.09.2015 से प्रारम्भ कर दिया गया था। माह मार्च, 2016 तक कुल 92 सजीव ई-व्याखान प्रसारित किये गये तथा 81 रिकार्ड किये गये सजीव ई-व्याखान को वेबपोर्टल पर उपलब्ध कराये गये।
     सत्र 2016-17 में प्रदेश की 13 पॉलीटेक्निक संस्थाओं में स्थित वर्चुअल क्लासरूम में दोनों ई0एम0आर0सी0 स्टूडियों के माध्यम से आमंत्रित विषय-विशेषज्ञों द्वारा कुल 101 सजीव ई-व्याख्यान प्रसारित किये गये तथा 93 रिकार्ड किये गये सजीव ई-व्याख्यान का वेबपोर्टल पर उपलब्ध कराये गये।
    सत्र 2017-18 में प्रदेश की 13 पॉलीटेक्निक संस्थाओं में स्थित वर्चुअल क्लासरूम में दोनों ई0एम0आर0सी0 स्टूडियों के माध्यम से आमंत्रित विषय-विशेषज्ञों को आमंत्रित कर कुल 150 सजीव ई-व्याख्यान का प्रसारण कराया जाना प्रस्तावित है।

 

अन्य महत्वपूर्ण कार्य

संस्थान ब्रोशन, प्रशिक्षण कैलेण्डर

प्रदेश की पॉलीटेक्निक संस्थाओं में संचालित पाठ्यक्रमों को उद्योगों / सर्विस सेक्टर एवं मार्केट की मांग के अनुसार अधिकाधिक रोजगारपकर बनाने के उपरान्त एवं संस्थाओं से प्राप्त फीडबैक के आधार पर कार्यरत शैक्षिक / शिक्षणेत्तर स्टाफ की कार्यकुशलता एवं शैक्षिक स्तर में गुणात्मक अभिवृद्धि हेतु एन0आई0टी0टी0आर0 चण्डीगढ़, शोध विकास एवं प्रशिक्षण संस्थान उ0प्र0 कानपुर एवं पॉलीटेक्निक संस्थाओं के विषय-विशेषज्ञों से प्राप्त सुझावों एवं पुनरीक्षित पाठ्यचर्या के आधार पर वित्तीय वर्ष 2017-18 हेतु प्रशिक्षण कलेण्डर (ओ-प्लान) तैयार कर तैयार ओ-प्लान के आधार पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आयोजित किया जा रहा है।

सी0डी0टी0पी0 योजनान्तर्गत कार्य

सी0डी0टी0पी0 योजनान्तर्गत शासन के निर्देशानुसार प्रशिक्षण केन्द्रों के विभिन्न ट्रेडों के प्रशिक्षणार्थियों की परीक्षा (एसेसमेन्ट तथा वैलुएशन) हेतु वर्ष 2012-13 में कुल 463, वर्ष 2013-14 में कुल 609, वर्ष 2014-15 में कुल 640, वर्ष 2015-16 में कुल 365 तथा वर्ष 2016-17 में कुल 194 परीक्षक नियुक्त किये गये हैं।

इन्ट्रीगल विश्वविद्यालय के अन्तर्गत संचालित पॉलीटेक्निकों के 07 पाठ्यक्रमों की पाठ्यचर्याओं का परीक्षण कार्य कराया गया।

कम्प्यूटर सेन्टर

इलेक्ट्रनिक्स विभाग भारत सरकार के सहयोग से संस्थान में वर्ष 1989 में कम्प्यूटर सेन्टर की स्थापना की गयी है, जिससे संस्थान के विभिन्न कोष्ठकों के कार्य कलापों को क्रियान्वित करने में तीव्र गति प्रदान हुयी। प्रदेश की प्रत्येक पॉलीटेक्निक संस्था में कम्प्यूटर प्रयोगशाला सुसज्जित रूप से स्थापित है। अत: पॉलीटेक्निक संस्थाओं के शैक्षिक स्टाफ को कम्प्यूटर प्रयोग हेतु प्रशिक्षण की आवश्यकता रहती है। विभिन्न कार्य कलापों में कम्प्यूटर के प्रयोग के साथ-साथ शिक्षा एवं शिक्षण माध्यम के रूप में इसका उपयोग निहित है। पॉलीटेक्निक स्तर पर कम्प्यूटर का प्रयोग एवं उपयोगिता हेतु शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाता है।

पुस्तकालय

संस्थान के पुस्तकालय का उपयोग विषय-विशेषज्ञों द्वारा पाठ्यचर्या संशोधन / निर्माण कार्य एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों में किया जाता है। पुस्तकालय में पुस्तकों एवं पत्रिकाओं के अतिरिक्त संस्थान द्वारा क्रय किये गये एजूकेशनल वीडियो कैसेट्स तथा संस्थान द्वारा‍ विकसित विभिन्न पाठ्य सामग्री भी विषय-विशेषज्ञों, प्रशिक्षणार्थियों एवं संस्थान के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के द्वारा प्रयोग किया जाता है।

छात्रावास

प्रशिक्षण कार्यक्रमों में संस्थाओं से आने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा अन्य उच्च संस्थाओं से आने वाले विषय-विशेषज्ञों के ठहरने के लिए संस्थान परिसर में एक 50 कमरों का छात्रावास उपलब्ध है जिसमें 04 डबल बेडरूम ए0सी0 कक्ष, 10 डबल बेडरूम कक्ष एवं 36 सिंगल बेडरूम कक्ष बने हुए है।