डिप्लोमा सेक्टर

संगठन संरचना

डिप्लोमा स्तरीय संस्थाओं का प्रशासनिक नियंत्रण

प्राविधिक शिक्षा निदेशालय

प्रदेश में चल रही डिप्लोमा स्तरीय संस्थाओं के प्रशासन तथा संचालन का सम्पूर्ण दायित्व प्राविधिक शिक्षा निदेशालय, उत्तर प्रदेश, कानपुर का है, जिसके प्रमुख निदेशक प्राविधिक शिक्षा हैं। इनकी सहायता के लिये निम्नांकित अधिकारी हैं:-

सामान्य प्रशासन
1 अपर निदेशक दो
2 उप निदेशक तीन
3 सहायक निदेशक चार
4 शोध अधिकारी एक
वित्त एवं लेखा प्रशासन
1 वित्त नियंत्रक एक
2 वित्त एवं लेखाधिकारी एक
3 सहायक लेखाधिकारी दो

उक्त के अतिरिक्त चार क्षेत्रीय कार्यालय, वाराणसी, लखनऊ, दौराला (मेरठ) एवं झांसी में है। इन क्षेत्रीय कार्यालयों के कार्यालयाध्यक्ष सम्बन्धित क्षेत्रीय संयुक्त निदेशक हैं, जिनकी सहायता के लिए एक-एक वित्त एवं लेखाधिकारी का पद सृजित है। इनका मुख्य कार्य क्षेत्रीय डिप्लोमा स्तरीय संस्थाओं का पर्यवेक्षकीय नियंत्रण है।

प्राविधिक शिक्षा परिषद

इस कार्यालय का प्रमुख, परिषद का सचिव होता है तथा इसके अध्यक्ष/उपाध्यक्ष शासन द्वारा नामित किये जाते हैं। परिषद के अध्यक्ष/उपाध्यक की सहायता के लिए निम्नांकित पद सृजित हैं:-

1 सचिव एक
2 संयुक्त सचिव एक
3 उप सचिव एक
4 सहायक प्रोफ़ेसर एक
5 सहायक सचिव दो
6 परीक्षा अधीक्षक एक
7 सहायक लेखाधिकारी एक

प्राविधिक शिक्षा परिषद का कार्य प्रदेश की पालीटेक्निकों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे छात्रों की परीक्षा आयोजित कराना तथा निजी क्षेत्र की पालीटेक्निकों को सम्बद्धता प्रदान करना है।

शोध, विकास एवं प्रशिक्षण संस्थान

संस्थान का प्रमुख, संस्था का निदेशक होता है तथा उसकी सहायता के लिए निम्नांकित पद सृजित हैं:-

1 उप निदेशक एक
2 प्राचार्य एक
3 पाठ्यपुस्तक अधिकारी एक
4 असिस्टेंट प्रोफेसर चार
5 प्रवक्ता कम्प्यूटर एक
6 सहायक लेखाधिकारी एक

संस्थान का कार्य संकाय प्रशिक्षण, पाठयचर्या विकास/प्रशिक्षण, पाठय संसाधन विकास एवं शैक्षिक व तकनीकी कार्य करना है।

संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद

यह एक स्वशासी स्ववित्त पोषित संस्था है तथा सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट के अधीन पंजीकृत है। इस परिषद का विभागध्यक्ष निदेशक, संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद होता है तथा प्रमुख सचिव, प्राविधिक शिक्षा, उ0प्र0 शासन इस परिषद के पदेन अध्यक्ष होते है। परिषद के निदेशक की सहायता के लिये निम्नांकित पद भी सृजित हैं:-

1 सचिव (कार्यालयाध्यक्ष) एक
2 उप सचिव एक
3 सहायक लेखाधिकारी एक

यह संस्था प्रदेश की सभी पालीटेक्निकों में प्रवेश के लिये प्रदेश स्तरीय संयुक्त प्रवेश परीक्षा का आयोजन कराती है।

डिप्लोमा स्तर की संस्थायें

प्रदेश में विभाग के अधीनस्थ 136 राजकीय, 19 अनुदानित एवं 410 निजी क्षेत्र में स्थापित संस्थाओं में प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है तथा इनके अतिरिक्त 38 राजकीय पालीटेक्निक संस्थाएं अभी अवस्थापना प्रक्रिया में है, डिप्लोमा स्तर की संस्थाओं की सूची परिशिष्ट-2 के भाग-1 पर दी गई है।

मल्टी प्वाइंट इन्ट्री एण्ड क्रेडिट सिस्टम प्रणाली

        मल्टी प्वाइंट इंट्री एण्ड क्रेडिट सिस्टम प्रणाली प्रदेश के चार पॉलीटेक्निकों क्रमश: राजकीय महिला पॉलीटेक्निक लखनऊ, राजकीय पॉलीटेक्निक कानपुर, डा0 अम्बेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी फार हैण्डीकैप्ड कानपुर तथा एन0आर0आई0पी0टी0 इलाहाबाद में लागू है।
         डिप्लोमा पाठयक्रम में व्याख्यान, प्रयोगात्मक कार्य, गृह कार्य तथा औद्योगिक स्थल की यात्रा एवं स्वाध्याय के माध्यम से प्रशिक्षण पूर्ण कराया जाता है। प्रत्येक विषय को एक निश्चित महत्व दिया जाता है। मल्टी प्वाइंट इन्ट्री एण्ड क्रेडिट सिस्टम प्रणाली से डिप्लोमा प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले छात्रों को यह वेटेज प्राप्त करने होते है। प्रत्येक विषय को दिये गये वेटेज को ही क्रेडिट सिस्टम कहा गया है।
छात्र को क्रेडिट तभी प्रदान किये जाते है जब वह सफलतापूर्वक विषय की परीक्षा को उत्तीर्ण कर लेता है प्रत्येक छात्र को पाठयक्रम का प्रशिक्षण पूर्ण करने के उपरान्त पाठयक्रम के लिए निर्धारित क्रेडिट अर्जित करने होते है तभी छात्र सम्बन्धित पाठयक्रम में डिप्लोमा प्राप्त करने हेतु अर्ह होता है।
         उदाहरण के लिए एक छात्र जो 10+2 परीक्षा भौतिक, रसायन एवं गणित विषय के साथ उत्तीर्ण है डिप्लोमा इन आर्कीटेक्चरल असिस्टेन्टशिप पाठयक्रम में प्रवेश लेता है इस छात्र को प्रथम सेमेस्टर में भौतिक, रसायन एवं गणित विषयों में छूट प्रदान की जायेगी और इन विषयों के लिए निर्धारित क्रेडिट 7+4+6=7 स्वत: छात्र को प्रदान कर दिये जायेगें। प्रथम सेमेस्टर में अधिकतम 6 विषय में पंजीकरण की सुविधा इस छात्र को अनुमन्य होगी। इन 6 विषयों में उत्तीर्ण होने पर विषयों हेतु निर्धारित क्रेडिट छात्र को प्रदान कर दिये जायेगें। यदि छात्र इन 6 विषयों में से किसी भी विषय में अनुत्तीर्ण होता है तो अगले सेमेस्टर में उसका 6 विषयों में पंजीकरण नहीं किया जायेगा। द्वितीय सेमेस्टर के उपरान्त यदि छात्र द्वारा 20 क्रेडिट अर्जित नहीं किये जाते है तो उसका तृतीय सेमेस्टर में पंजीकरण नहीं किया जायेगा। वार्षिक प्रणाली की भाँति उसे पुन: प्रथम दो सेमेस्टर के विषयों में पंजीकरण कराकर 20 क्रेडिट अर्जित करने होगें।
        मेधावी छात्र इस प्रकार सेमेस्टर में 6 विषय लेकर डिप्लोमा पाठयक्रम निर्धारित समय से पूर्व, पाठयक्रम हेतु निर्धारित कुल (आर्कीटेक्चरल एसिस्टेन्टशिप 152 क्रेडिट) क्रेडिट प्राप्त कर डिप्लोमा प्रशिक्षण पूर्ण कर लेगा। आर्कीटेक्चरल एसिस्टेन्टशिप पाठयक्रम में कुल 28 विषय है जिनके लिए कुल निर्धारित क्रेडिट 152 है। इस प्रकार तीन विषयों में छूट दिये जाने के उपरान्त शेष 25 विषयों को प्रत्येक सेमेस्टर में 6 विषय लेकर तथा अंतिम सेमेस्टर में 6 विषय तथा प्रोजेक्ट विषय लेकर यह तीन वर्षीय पाठयक्रम दो वर्ष में भी पूर्ण किया जा सकता है।